13.1.15

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थॉयराइड हार्मोन की कमी का उपचार कैसे किया जाता है ?

थॉयराइड हार्मोन की कमी का उपचार थॉयराक्सिन हार्मोन द्वारा किया जाता है जो टेबलेट के रूप में दिया जाता है। यह टेबलेट कोई दवा न होकर शरीर में बनने वाला थॉयराक्सिन हार्मोन है।


थॉयराइड हार्मोन बनना क्यो कम हो जाता है ?

हमारे शरीर में गले में सांस नली ज्तंबीमं से तितली के पंखो के आकार की लिपटी हुई  ग्रंथि होती है जिसे थॉयराइड कहते हैं. यह थॉयराक्सिन हार्मोन बनाती है।शरीर में किसी संक्रमण (इंफेक्शन) के कारण शरीर की प्रतिरोधी क्षमता (इम्यून सिस्टम) द्वारा एंटीबॉडीज़ बनाई जाती है जो संक्रमण को समाप्त करती है। कुछ व्यक्तियों में जेनेटिक कारणों से संक्रमण के पश्चात शरीर की प्रतिरोधी क्षमता संक्रमण को तो समाप्त करती ही है, लेकिन साथ ही थॉयराइड ग्रंथी को भी क्षति पहुँचाती है। इस क्षति के परिणामस्वरूप थॉयराइड ग्रंथी सामान्य से कम हार्मोन बनाने लगती है।

यहाँ तक कि पाँच हजार में एक बच्चे में तो यह ग्रंथि जन्म से ही अनुपस्थित होती है जिसके कारण हार्मोन बिल्कुल नही बनता एवं इन बच्चों को जीवन भर थायरॉक्सीन की आवश्यकता होती है जिसे टेबलेट के जरिये दिया जाता है।

हार्मोन कम बनने का सम्बन्ध खाद्य पदार्थ से नही होता और न ही किसी विशेष खाद्य पदार्थ के सेवन करने से हार्मोन की पूर्ति की जा सकती है। हायपोथॉइराडिज्म थॉयराइड हार्मोन की कमी से होता है अत: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नही फैलता।

थॉयराइड हार्मोन की टेबलेट कब लेना चाहिये ?

इसकी टेबलेट सुबह खाली पेट लेना चाहिये क्योंकि खाली पेट यह शीघ्र आंतो द्वारा अवशोषित होती है। इसके अतिरिक्त एक निश्चित समय टेबलेट लेने का होना चाहिये जिससे प्रतिदिन टेबलेट लेने की नियम बन जाये। उसके लिये सुबह का समय उपयुक्त होता है।  इसलिये इसे खाली पेट लेना चाहिये।

टेबलेट लेने के कितनी देर बाद से ही कुछ ले सकते है ?

टेबलेट लेने के पाँच मिनिट बाद से ही चाय, दूध आदि का सेवन कर सकते हैं।

यदि सुबह टेबलेट लेना भूल जाये तो क्या करना चाहिये ?

यदि सुबह टेबलेट लेना भूल जायें तो दिन में कभी भी याद आने पर इसे ले सकते हैं।

क्या थॉयराइड की टेबलेट जीवन भर लेना होगी ?

जी हाँ, इसे जीवन पर्यन्त लेना आवश्यक है, क्योंकि यह दवाई न होकर हमारे शरीर में प्रतिदिन बनने वाला हार्मोन है। चूकि थॉयराइड ग्रंथि जीवन पर्यन्त थॉयराक्सिन बनाती हैं, अत: इसे जीवन भर लेना आवश्यक है।

इस टेबलेट के दुष्प्रभाव क्या हैं ?

इस टेबलेट की डोस का निर्धारण थॉयराक्सिन हार्मोन की कमी के आधार पर किया जाता है। रक्त की जाँच कर हार्मोन की कमी का पता लगा कर कमी को पुरा करने के लिये टेबलेट की उचित मात्रा दी जाती है। यदि सही मात्रा ले रहे है तो कोई दुष्प्रभाव नही हो सकता। निर्धारित मात्रा से आधिक सेवन करने सेें हार्मोन की अधिकता हो जायेगी और अधिक हार्मोन से नुकसान हो सकते है। निर्धारित मात्रा से कम लेने पर रोग के लक्षण पुन: प्रकट हो सकते है।

थॉयराइड हार्मोन के लिये रक्त की जाँच कब कराना चाहिये ?

रक्त की जाँच का उद्देश्य व्यक्ति को कितने हार्मोन की आवश्यकता है यह जानना है।  प्रारम्भ में उपचार करने पर टेबलेट की सही मात्रा निर्धारण के लिये 3–6 माह में रक्त की जाँच की जाना चाहिये। इसके पश्चात् चिकित्सक की सलाह पर समय समय पर टेबलेट की उचित मात्रा निर्धारण के लिये की जाना चाहिये।

क्या उस दिन टेबलेट लेना चाहिये। जिस दिन रक्त की जाँच कराना होती है ?

उस दिन रक्त का नमूना जाँच के लिये देने के बाद टेबलेट अवश्य लेना चाहिये। अर्थात जाँच वाले दिन भी टेबलेट लेना चाहिये

उपचार के दौरान यदि अन्य कोई रोग जैसे बुखार, दस्त लगना, सर्दी खाँसी आदि हो जाये तो क्या थॉयराइड हार्मोन की टेबलेट उस दौरान निरन्तर लेना आवश्यक है ?

चूंकि हमारे शरीर में थॉयराइड ग्रंथि सतत् थॉयराइड हार्मोन बनाती है अत: उसकी कमी की पूर्ति सतत् होना आवश्यक है। अत: अन्य रोग हो जाने पर भी उस रोग के उपचार के साथ थॉयराइड हार्मोन की टेबलेट लेना आवश्यक है। इसे लेना बंद नही करें।

क्या रक्त में थॉयराइड हार्मोन की जाँच के लिये खाली पेट होना आवश्यक है ?

कुछ वर्ष पूर्व एलिसन, रेडियो इम्यून ैण्।ण् आदि से थॉयराइड हार्मोन की जाँच की जाती थी, जिसके लिये खाली पेट होना आवश्यक था। किन्तु आज कल अत्यन्त उच्च तकनीक से जाँच के कारण खाली पेट होना आवश्यक नही है।

क्या होम्योपैथी या आयुवेर्दिक पद्वति से हायपोथॉइराडिज्म़ का उपचार हो सकता है ?

इसकी चिकित्सा में जो टेबलेट दी जाती है, वह थॉयरॉक्सीन ही है अर्थात यह दवा न होकर शरीर में बनने वाला प्राकृतिक रसायन ही है। अत: हायपोथायराइडिज़्म में थॉयरॉक्सीन टेबलेट तो इसकी एक तरह से प्राकृतिक चिकित्सा है। अत: किसी होम्योपैथी या आयुर्वेदिक या अन्य किसी भी दवा से हायपोथायराइडिज़्म की चिकित्सा नहीं की जा सकती है। और फिर जब थॉयराइड द्वारा बनाया जाने वाला हार्मोन थॉयरॉक्सीन ही उपलब्ध है तो फिर किसी और दवाई की आवश्यकता ही नहीं है। चूँकि थॉयरॉक्सीन हार्मोन टेबलेट के रूप में दिया जाता है एवं काफी सस्ता है, बड़ी आसानी इसके डोज़ को एडजस्ट किया जा सकता है, इसलिये चिकित्सा विज्ञान में इससे संबंधित किसी नई दवा पर शोध भी नहीं किया जाता।

क्या योग या व्यायाम द्वारा उपचार संभव हैं ?

हायपोथॉइराडिज्म़ में थॉयराइड ग्रंथि क्षतिग्रस्त होने थॉयराइड हार्मोन कम बनता है। हार्मोन की कमी की पूर्ति हार्मोन द्वारा ही संभव है जो योग या व्यायाम नही कर सकता। अत: योग एवं व्यायाम का उपचार में कोई योगदान नही है।

क्या हार्मोन की कमी वाले व्यक्ति गर्भधारण योजना बना सकते है ?

हार्मोन की कमी वाले तभी गर्भधारण कर सकते है जब रक्त में उनका हार्मोन स्तर सामान्य हो। चूंकि गर्भधारण के दौरान बच्चे के विकास के लिये हार्मोन की आवश्यकता होती है जो उसे माँ से मिलता है। एक बार गर्भधारण के 4 माह और 7 माह में गोली की मात्रा का निर्धारण करना चाहिये ताकि माँ का हार्मोन स्तर सामान्य बना रहे और गर्भ में विकसित हो रहे बच्चे में थॉयराइड हार्मोन की कमी न हो। यदि गर्भवती महिला में थॉयराइड हार्मोन कम होगा तो उससे गर्भ में विकसित हो रहें बच्चें का मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होगा।


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