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रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर जब निर्धारित मात्रा से अधिक हो जाता है, तो इसे मधुमेह कहते हैं। रक्त में ग्लूकोज़ क्यों बढ़ जाता है, व इसके बढ़ जाने से शरीर में क्या समस्याऎं उत्पन्न होती हैं, यह जानना मधुमेह को समझने के लिये आवश्यक है।
रक्त में ग्लूकोज़ स्तर बढ़ने का कारण इन्सुलिन नामक हार्मोन की मात्रा में कमी या इन्सुलिन की कार्यक्षमता में कमी है। इन्सुलिन एवं ग्लूकोज़ के संबंध को समझने के लिए शरीर की कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक है।
शरीर की कार्यप्रणाली : हमारा शरीर बहुत सी छोटी-छोटी इकाइयों अर्थात अति सूक्ष्म कोशिकाओं से बना होता है। हर कोशिका के भीतर विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाऎं होती हैं, जिसके लिये उर्जा की जरूरत होती है, और ग्लूकोज़ उर्जा की इस जरूरत की पूर्ति करता है। एक तरह से शरीर की कोशिका के लिए ग्लूकोज़ वैसा ही है, जैसे कार के लिए पेट्रोल । शरीर की कोशिकाएँ ग्लूकोज़ के बिना काम नहीं कर सकती हैं। भोजन का उददेश्य शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज़ प्रदान करना एवं उनकी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।
हमारे भोजन में उपस्थित कार्बोहाईड्रेट आँतों में पाचन के पश्चात ग्लूकोज़ में बदलता है। यह ग्लूकोज़ रक्त में पहुँचता है और रक्त वाहिनियों के जरिये शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचता है, जहाँ से यह शरीर की कोशिकाओं के भीतर पहुँचता है ।
रक्त में ग्लूकोज़ भोजन के माध्यम से पहुँचता है, परंतु जब हम खाली पेट होते हैं तब लीवर रक्त में ग्लूकोज़ पहुँचाता है। अर्थात खाली पेट होने पर भी रक्त में ग्लूकोज़ लगातार पहुँचता रहता है। हमारे शरीर में लीवर ग्लूकोज़ का स्टोर हाऊस है, जिसका कार्य खाली पेट की स्थिति में ग्लूकोज़ को रक्त में लगातार भेजना है।
रक्त में ग्लूकोज़ पहुँचने के बाद इसे शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाने की आवश्यकता होती है। कोशिकाओं में एक दरवाजा होता है, जिसे ग्लट-4 (Glut-4) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह दरवाजा बंद होता है। ग्लूकोज़ कोशिकाओं के भीतर तभी प्रवेश कर सकता है, जब यह दरवाजा खुला हो ।
शरीर की कोशिकाओं में मौजूद इस दरवाजे के खुलने पर ग्लूकोज़ कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है व उर्जा प्रदान करता है। रक्त से ग्लूकोज़ को कोशिकाओं में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया काफि जटिल है, और यह तथ्य इन्सुलिन व ग्लूकोज़ की रिश्तेदारी का आधार है। ग्लूकोज़ को कोशिकाओं के भीतर प्रवेश दिलाने का काम इन्सुलिन करता है। चित्र में दिखाये अनुसार, हमारे रक्त में पहुँच रहे ग्लूकोज़ को, इन्सुलिन, एक दरबान की तरह, कोशिकाओं के भीतर प्रवेश दिलाता है और यह ग्लूकोज़ ही हमें उर्जा प्रदान करता है।
इन्सुलिन क्या है ?
हमारे पेट में अमाशय के पीछे अग्नाशय पैंक्रियाज़ ग्रंथि होती है। इस ग्रंथि में इन्सुलिन बनाने वाले ऊतक को आइलेटस आफ लैंगरहंस (Islets of Langerhans) कहा जाता है। इन आइलेटस में बीटा सेल्स होती हैं, जो इन्सुलिन नामक हार्मोन का निर्माण करती हैं।
जब भी रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ता है, तो इसकी जानकारी बीटा सेल्स को मिलती है और वे इन्सुलिन का स्त्राव करती हैं। इस तरह ग्लूकोज़ स्तर एवं इन्सुलिन का स्त्राव एक दूसरे पर आधारित हैं। यह इनसुलिन रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होकर शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुँचता है। शरीर की कोशिकाओं से जुड़कर यह इन्सुलिन ग्लूकोज़ को भीतर प्रवेश दिलाता है और अनेक जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
इन्सुलिन कोशिकाओं पर मौजूद दरवाजा अथार्त ग्लट-4 को खोलता है, जिससे ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है व कोशिकाओं के लिए उर्जा निमार्ण के स्त्रोत का काम करता है। एक तरह से इन्सुलिन कोशिकाओं में लगे ताले को खोलता है, ताकि ग्लूकोज़ भीतर प्रवेश कर सके। भीतर पहुँचने के बाद चयापचय की प्रक्रिया शुरू होती है जिसके फलस्वरूप उर्जा उत्पन्न होती है, जो शरीर की विभिन्न कार्यप्रणालियों को चलाने के लिये आवश्यक है।
इन्सुलिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण हार्मोन है जिसके अनेक कार्य हैं, जिनमें से एक है ग्लूकोज़ को कोशिका के भीतर पहुँचाना । इसके अतिरिक्त इन्सुलिन ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल आदि के नियंत्रण में भी काफी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इन्सुलिन ग्लूकोज़ नियंत्रण के अलावा शरीर की अनेक जैविक क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। अतः इन्सुलिन को शरीर की रासायनिक मशीनरी की मास्टर चाबी कहा जा सकता है।
इन्सुलिन एवं मधुमेह :
जब पैंक्रियाज़ से इन्सुलिन कम मात्र में निकल रहा हो या इन्सुलिन निकल रहा हो परंतु कार्य नहीं कर पा रहा हो अर्थात इन्सुलिन अवरोध (Insulin Resistance) की स्थिति हो, तो रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर तो बढ़ने लगता है लेकिन, इन्सुलिन की कमी से, यह ग्लूकोज़ रक्त से कोशिकाओं के भीतर नहीं जा पाता बढ़ने लगता है। इसी अवस्था का नाम मधुमेह है।
अतः मधुमेह में रक्त में मौजूद ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर पाता, जिसके परिणामस्वरूप एक ओर तो रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ने लगता है, वहीं दूसरी और शरीर की कोशिकाओं को उर्जा के लिये ग्लूकोज़ नहीं मिलता है। अर्थात मधुमेह ऎसी अवस्था है, जिसमें रक्त में अधिक ग्लूकोज़ होने पर भी भीतर की कोशिकाऎं ग्लूकोज़ से वंचित रहती हैं।
मधुमेह का अर्थ
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रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर जब निर्धारित मात्रा से अधिक हो जाता है, तो इसे मधुमेह कहते हैं। रक्त में ग्लूकोज़ क्यों बढ़ जाता है, व इसके बढ़ जाने से शरीर में क्या समस्याऎं उत्पन्न होती हैं, यह जानना मधुमेह को समझने के लिये आवश्यक है।
रक्त में ग्लूकोज़ स्तर बढ़ने का कारण इन्सुलिन नामक हार्मोन की मात्रा में कमी या इन्सुलिन की कार्यक्षमता में कमी है। इन्सुलिन एवं ग्लूकोज़ के संबंध को समझने के लिए शरीर की कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक है।
शरीर की कार्यप्रणाली : हमारा शरीर बहुत सी छोटी-छोटी इकाइयों अर्थात अति सूक्ष्म कोशिकाओं से बना होता है। हर कोशिका के भीतर विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाऎं होती हैं, जिसके लिये उर्जा की जरूरत होती है, और ग्लूकोज़ उर्जा की इस जरूरत की पूर्ति करता है। एक तरह से शरीर की कोशिका के लिए ग्लूकोज़ वैसा ही है, जैसे कार के लिए पेट्रोल । शरीर की कोशिकाएँ ग्लूकोज़ के बिना काम नहीं कर सकती हैं। भोजन का उददेश्य शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज़ प्रदान करना एवं उनकी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।
हमारे भोजन में उपस्थित कार्बोहाईड्रेट आँतों में पाचन के पश्चात ग्लूकोज़ में बदलता है। यह ग्लूकोज़ रक्त में पहुँचता है और रक्त वाहिनियों के जरिये शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचता है, जहाँ से यह शरीर की कोशिकाओं के भीतर पहुँचता है ।
रक्त में ग्लूकोज़ भोजन के माध्यम से पहुँचता है, परंतु जब हम खाली पेट होते हैं तब लीवर रक्त में ग्लूकोज़ पहुँचाता है। अर्थात खाली पेट होने पर भी रक्त में ग्लूकोज़ लगातार पहुँचता रहता है। हमारे शरीर में लीवर ग्लूकोज़ का स्टोर हाऊस है, जिसका कार्य खाली पेट की स्थिति में ग्लूकोज़ को रक्त में लगातार भेजना है।
रक्त में ग्लूकोज़ पहुँचने के बाद इसे शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाने की आवश्यकता होती है। कोशिकाओं में एक दरवाजा होता है, जिसे ग्लट-4 (Glut-4) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह दरवाजा बंद होता है। ग्लूकोज़ कोशिकाओं के भीतर तभी प्रवेश कर सकता है, जब यह दरवाजा खुला हो ।
शरीर की कोशिकाओं में मौजूद इस दरवाजे के खुलने पर ग्लूकोज़ कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है व उर्जा प्रदान करता है। रक्त से ग्लूकोज़ को कोशिकाओं में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया काफि जटिल है, और यह तथ्य इन्सुलिन व ग्लूकोज़ की रिश्तेदारी का आधार है। ग्लूकोज़ को कोशिकाओं के भीतर प्रवेश दिलाने का काम इन्सुलिन करता है। चित्र में दिखाये अनुसार, हमारे रक्त में पहुँच रहे ग्लूकोज़ को, इन्सुलिन, एक दरबान की तरह, कोशिकाओं के भीतर प्रवेश दिलाता है और यह ग्लूकोज़ ही हमें उर्जा प्रदान करता है।
इन्सुलिन क्या है ?
हमारे पेट में अमाशय के पीछे अग्नाशय पैंक्रियाज़ ग्रंथि होती है। इस ग्रंथि में इन्सुलिन बनाने वाले ऊतक को आइलेटस आफ लैंगरहंस (Islets of Langerhans) कहा जाता है। इन आइलेटस में बीटा सेल्स होती हैं, जो इन्सुलिन नामक हार्मोन का निर्माण करती हैं।
जब भी रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ता है, तो इसकी जानकारी बीटा सेल्स को मिलती है और वे इन्सुलिन का स्त्राव करती हैं। इस तरह ग्लूकोज़ स्तर एवं इन्सुलिन का स्त्राव एक दूसरे पर आधारित हैं। यह इनसुलिन रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होकर शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुँचता है। शरीर की कोशिकाओं से जुड़कर यह इन्सुलिन ग्लूकोज़ को भीतर प्रवेश दिलाता है और अनेक जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
इन्सुलिन कोशिकाओं पर मौजूद दरवाजा अथार्त ग्लट-4 को खोलता है, जिससे ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है व कोशिकाओं के लिए उर्जा निमार्ण के स्त्रोत का काम करता है। एक तरह से इन्सुलिन कोशिकाओं में लगे ताले को खोलता है, ताकि ग्लूकोज़ भीतर प्रवेश कर सके। भीतर पहुँचने के बाद चयापचय की प्रक्रिया शुरू होती है जिसके फलस्वरूप उर्जा उत्पन्न होती है, जो शरीर की विभिन्न कार्यप्रणालियों को चलाने के लिये आवश्यक है।
इन्सुलिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण हार्मोन है जिसके अनेक कार्य हैं, जिनमें से एक है ग्लूकोज़ को कोशिका के भीतर पहुँचाना । इसके अतिरिक्त इन्सुलिन ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल आदि के नियंत्रण में भी काफी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इन्सुलिन ग्लूकोज़ नियंत्रण के अलावा शरीर की अनेक जैविक क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। अतः इन्सुलिन को शरीर की रासायनिक मशीनरी की मास्टर चाबी कहा जा सकता है।
इन्सुलिन एवं मधुमेह :
जब पैंक्रियाज़ से इन्सुलिन कम मात्र में निकल रहा हो या इन्सुलिन निकल रहा हो परंतु कार्य नहीं कर पा रहा हो अर्थात इन्सुलिन अवरोध (Insulin Resistance) की स्थिति हो, तो रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर तो बढ़ने लगता है लेकिन, इन्सुलिन की कमी से, यह ग्लूकोज़ रक्त से कोशिकाओं के भीतर नहीं जा पाता बढ़ने लगता है। इसी अवस्था का नाम मधुमेह है।
अतः मधुमेह में रक्त में मौजूद ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर पाता, जिसके परिणामस्वरूप एक ओर तो रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ने लगता है, वहीं दूसरी और शरीर की कोशिकाओं को उर्जा के लिये ग्लूकोज़ नहीं मिलता है। अर्थात मधुमेह ऎसी अवस्था है, जिसमें रक्त में अधिक ग्लूकोज़ होने पर भी भीतर की कोशिकाऎं ग्लूकोज़ से वंचित रहती हैं।
मधुमेह का अर्थ
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